सारथी - शिक्षा और विकास में सामाजिक सहभागिता



प्रिय जनपदवासियों,
सादर प्रणाम।
आज मैं आपसे जनपद के सरकारी स्कूलों की व्यवस्था के विषय में बात करना चाहता हूँ।


आदि काल से भारत में शिक्षा/ज्ञान का आधार सामाजिक व्यवस्था थी। तक्षशिला, नालन्दा और विक्रमशिला विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी गुरूकुलों से ही आते थे। छात्र और गुरू का सीधा सम्बन्ध होता था और समाज के निर्माण में इस शैक्षिक व्यवस्था का ही व्यापक असर रहता था। कम सुविधाओं के बाद भी शिक्षा और नैतिक स्तर उच्च कोटि का होता था। आज उच्च विडम्बना यह है कि बिल्डिंग, भोजन, किताबें, यूनिफार्म, चिकित्सा, छात्रवृत्ति और शिक्षकों को भरपूर वेतनमान जैसी सुविधा होने के बावजूद स्कूलों का शैक्षिक वातावरण श्रेष्ठ नहीं हैं।


आरोप–प्रत्यारोप एवं व्यवस्था पर दोषारोपण आबादी, शिक्षकों का अन्य कार्यों में व्यस्त रहना, लिंग–भेद, जाति–भेद, गरीबी आदि का उदाहरण देकर वाद विवाद में समस्याओं का समुचित समाधान नहीं हो पाता। फलस्वरुप होता यह है कि हम कारणों में उलझ कर रह जाते हैं। हमारा उद्देश्य एक–जुट होकर, हाथ से हाथ मिलाकर समस्या का समाधान करना है।


इस जनतान्त्रिक व्यवस्था में सरकार जनता की है, ये स्कूल भी जनता के हैं, इनका परिचालन जनता के पैसे से होता है, और इनमें पढ़ने वाले बच्चे हमारे समाज के हैं। फिर इन स्कूलों की ओर से समाज उदासीन क्यों है ?


आज जरूरत इस बात की है कि हम व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठ कर समाज के व्यापक हित में कुछ प्रयास करें। हमारा अपना बच्चा तो किसी निजी स्कूल में शिक्षा पाये और पड़ोसी का बच्चा अशिक्षित रह जाये, या निम्न कोटि की शिक्षा पाये तो इस स्थिति में हम समाज तथा देश की समग्र उन्नति की कल्पना कैसे कर सकते है। प्राय: सामाजिक कुरीतियां, अन्धविश्वास, अपराध आदि शिक्षा के अभाव में ही विकसित होते हैं। एक सुखी सबल समाज एवं उन्नत प्रगतिशील राज्य की परिकल्पना तभी साकार हो सकती है जब ‘‘
सब पढ़ें–सब बढ़ें’’।


इन स्कूलों के बच्चों को आपके स्नेह तथा संरक्षण की सबसे अधिक आवश्यकता है। हमें यह देखना होगा कि शिक्षा मात्र बच्चों की उपस्थिति या शिक्षकों की उपस्थिति अंकित होने तक ही सिमट कर न रह जाये, बल्कि हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि स्कूलों में बच्चों का सर्वांगीण विकास हो। ये बच्चे किसी की दया के पात्र न होकर आपके प्यार, समय व आपकी लगन के हकदार बने। सरकारी व्यवस्था में जांच, निरीक्षण आदि होते है, परन्तु निरीक्षक किसी एक ही विद्यालय पर निरन्तर ध्यान केन्द्रित नहीं कर सकता। इसके लिए समाज के कुछ समूह/संस्थाएँ आगेे बढ़ कर स्कूलों को लम्बे समय के लिये अंगीकृत करें। आप ही नहीं आपका परिवार भी अपने निकट के विद्यालय की कठिनाइयों की जड़ तक पहुँच कर सरकारी संसाधनों के माध्यम से उनका युक्तियुक्त समाधान खोजने में सहायक सिद्ध हो। जब आप एक स्कूल को अभिभावक के रुप में अंगीकृत कर लें तथा उसकी शैक्षिक व अन्य गतिविधियों में भागीदार हो जायें तो हम आपसे आशा करते हैं कि आप–


1-शिक्षकों को विद्यालय में नियमित उपस्थित रहने तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षण के लिए प्रेरित करें तथा उनकी समस्याओं के समाधान का प्रयास करें।
छात्रों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करते हुए उन्हें अनुशासित, परिश्रमी तथा अध्ययनशील बनने के लिए प्रे्ररित करें। माता अभिभावक संघ को गतिशील बनायें।
2-छात्रों में सकारात्मक प्रतियोगी भावना विकसित करें ताकि वे भविष्य मे अपनी प्रगति के मार्ग स्वयं खोज सकें।
3-विद्यालयों में निर्धारित पाठ्यक्रम पूरी तरह से लागू करना सुनिश्चित करें।
4-स्कूल छोड़ने वाले छात्रों, विशेषकर छात्राओं को अपनी शिक्षा पूरी करने और उच्चतम शिक्षा ग्रहण करने हेतु प्रेरित करें।
5-छात्रों के अभिभावकों से आत्मीय सम्बन्ध विकसित करके उनकी समस्याओं का समाधान खोजते हुए बच्चों की शिक्षा में उनकी सक्रिय भागीदारी बढ़ाने का प्रयास करें।
6-मिड–डे–मील योजना के सफल क्रियान्वयन हेतु सुनिश्चित करें कि छात्रों को गर्म पौष्टिक भोजन मानकों के अनुरूप उपलब्ध कराया जा रहा है, भोजन पकाने वालों को वेतन भुगतान हो रहा है, रसोई घर पर शेड डला हुआ है और रसोई गैस की उपलब्धता बनी हुई है।
7-सुनिश्चित करें कि विद्यालय का वातावरण स्वास्थ्य के अनुकूल है, बिजली पानी की उचित व्यवस्था है, स्वच्छता का स्तर ठीक है, क्लास–रूम, दीवारें, बाथरूम और विद्यालय के परिसर की स्वच्छता तथा रख–रखाव ठीक है।
8-छात्रवृत्ति, यूनिफार्म, स्कूल बैग, पुस्तकें आदि का वितरण एवं उपयोग ठीक प्रकार से होना सुनिश्चित करें।

संक्षेप में हम आपसे अपेक्षा करते हैं कि आप इन बच्चों की न केवल देखभाल करें बल्कि महसूस करें कि वो आपके अपने बच्चे है। आप इन बच्चों को अपना स्नेह दें, उनके जन्मदिन पर बधाई दें, उनके सुख–दु:ख बाँटें और आने वाले वर्षों में आप उनका हाथ पकड़कर, उनको मार्गदर्शन देकर उनका शैक्षिक और सामाजिक स्तर ऊँचा करें। राष्ट्रीय स्तर के कई समूह जैसे शिवनादर फाउन्डेशन, वेदान्ता, टाईम्स फाउन्डेशन पहले से ही इस दिशा में सराहनीय कार्य कर रहे हैं।


आपसे आर्थिक सहयोग की कोई अपेक्षा नहीं है, हमारा उद्देश्य यह है कि इन प्राथमिक स्कूलो से पढ़कर उच्चतम शिक्षा ग्रहण करें एवं भविष्य मे सफल, जिम्मेदार तथा अनुशासित नागरिक के रूप में उभरकर विभिन्न क्षेत्र में ऐसे कीर्तिमान स्थापित करें कि आप उन पर गर्व कर सकें। अपने महान देश को विकसित तथा प्रगतिशील बनाने के लिए शिक्षा के विकास हेतु आपका जुड़ाव केवल एक–दो शैक्षिक सत्र के लिए नहीं बल्कि प्रतिबद्धता के साथ दीर्घ अवधि के लिए होगा, तभी इसका प्रभाव महसूस किया जा सकेगा। विद्यालय अंगीकृत करने के लिये आपको एक साधारण शपथ–पत्र देना होगा जिसे आप एन0आई0सी0 की वेबसाईट
muzaffarnagar.nic.in  अथवा बी0एस0ए0 कार्यालय से प्राप्त कर सकते हैं।


अन्त में आपसे यह अपील है कि अंगीकृत विद्यालयों के संचालन में अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को निभाते हुए उत्साह के साथ आगे आकर सहयोग करें। आपकी संवेदना स्नेह एवं प्रतिबद्धता विद्यालयों की व्यवस्था में गुणात्मक सुधार लायेंगे।

जिलाधिकारी
मुजफरनगर

अपने जनपद की बेसिक शिक्षा के विकास में अपनी रचनात्मक भागीदारी कर सारथी योजना में भाग लें  -      जिलाधिकारी मुजफ्फरनगर
अधिक जानकारी के लिये जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, मुजफ्फरनगर से सम्पर्क करें ।
जिलाधिकारी मुजफ्फरनगर की अपील
सारथी योजना में भाग लने के लिये  एफीडेविट  डाऊनलोड करें

दावात्याग:(Disclaimer) एन0आई0सी0 मुजफ्फरनगर इस वेबपृष्ठ पर प्रकाशित गलती के लिये जिम्मेदार नहीं है । इस वेबपृष्ठ पर दी गयी सामग्री एवं तथ्‍यों का उपयोग विधिक उददेश्‍य हेतु नहीं किया जा सकता।अधिक जानकारी के लिये सम्बन्धित विभाग से सम्पर्क करें ।

                  HOME