विभागीय अपीलीय अधिकारी के विरूद्ध सूचना आयोग में अपील = द्वितीय अपील

 
अपील के आधार धारा -19 (3)
सूचना आयोग के यहाँ निम्न दो आधारों पर अपील की जा सकती हैः-
  • यदि विभागीय अपीलीय अधिकारी द्वारा नियत समय में अपील का निस्तारण नहीं किया जाता है; अथवा
  • अनुरोधकर्ता विभागीय अपीलीय अधिकारी के निर्णय से असन्तुष्ट है
 
द्वितीय अपील करने की समय सीमा धारा -19 (3)
  • द्वितीय अपील प्रथम अपील के निर्णय की प्राप्ति की तिथि 90 दिनों के अन्दर की जा सकती है ।
  • यदि प्रथम अपील का कोई निर्णय निर्धारित समय सीमा के अन्दर प्राप्त नहीं होता है, तो दूसरी अपील के निर्णय की अपेक्षित तिथि से अधिकतम 90 दिनों के अन्दर की जा सकती है।
  • राज्य सूचना आयोग को यदि यह विश्वास हो जाता है कि अपीलकर्ता किन्ही अपरिहार्य कारणों से निर्धारित समय सीमा के अन्दर अपील करने में असमर्थ रहा है, तो निर्धारित समय सीमा के बाद भी द्वितीय अपील स्वीकार कर सकता है।
 
तीसरे पक्ष द्वारा द्वितीय स्तर पर अपील धारा -19 (4)
  • अधिनियम की धारा 11 के अन्तर्गत वर्णित तीसरे पक्ष द्वारा भी विभागीय अपीलीय अधिकारी के निर्णय के विरूद्ध सूचना आयोग में अपील की जा सकती है। राज्य सूचना आयोग ऐसे तीसरे पक्ष को सुनवाई का पूरा अवसर प्रदान करेगा।
 
सूचना उपलब्ध न कराये जाने के औचित्य को सिद्ध करने का दायित्व लोक सूचना अधिकारी पर धारा -19 (5),
  • अपील की सुनवाई में यह सिद्ध करने का दायित्व कि सूचना उपलब्ध न कराया जाना औचित्यपूर्ण था, सम्बन्धित लोक सूचना अधिकारी का होगा।
 
राज्य सूचना आयोग का निर्णय धारा -19 (8)
अपील पर निर्णय करते हुए राज्य सूचना आयोग के निम्न अधिकार है  -
  • वह लोक प्राधिकारी को निम्नलिखित कार्यवाही हेतु आदेशित कर सकता हैः-
  1. अनुरोधकर्ता को आदेश में उल्लेख किये गये रूप में सूचना उपलब्ध करायी जाय;
  2. यदि लोक प्राधिकारी द्वारा लोक सूचना अधिकारी नामित नहीं किया है तो शीघ्र उसे नामित किया जाय;
  3. निर्दिष्ट सूचनाओं को प्रकाशित किया जाय;
  4. अभिलेखों के रख-रखाव, प्रबन्धन और उनको नष्ट करने की पद्धतियों में आवश्यक परिवर्तन किया जाय;
  5. विभागीय अधिकारियों के लिए सूचना का अधिकार अधिनियम से सम्बन्धित जानकारी बढाने के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाय।
  6. धारा [4 (1) बी] के अन्तर्गत सूचनाओं की स्वैच्छिक घोषणा की जाय।
    (ब)
  • अनुरोधकर्ता को होने वाली हानि अथवा क्षति की पूर्ति किये जाने हेतु लोक प्राधिकारी को आदेश दे सकता है।
  • अधिनियम में प्राविधानित दण्ड आरोपित कर सकता है।
  • अपील के आवेदन को अस्वीकार कर सकता है।