अभिलेखों का रख - रखाव धारा 4(1) ए
प्रत्येक लोक प्राधिकारी अपने सभी अभिलेखों को सम्यक रूप से सूची बनाकर और क्रमवार इस तरह से रखेगा जिससे इस अधिनियम के अन्तर्गत सूचना का अधिकार आसानी से सुलभ हो सकें ।


अभिलेखों को कम्प्यूटरीकृत करना धारा 4(1) ए
प्रत्येक लोक प्राधिकारी यह सुनिश्चित करेगा कि ऐसे सभी अभिलेख जो कम्प्यूटरीकृत किये जाने के लिये समुचित है, युक्तियुक्त समय के भीतर और संसाधनों की उपलब्धता के अधीन रहते हुए कम्प्यूटरीकृत किये जाएं और विभिन्न प्रणालियों पर सम्पूर्ण देश में नेटवर्क के माध्यम से सम्बद्ध किये जाएं, जिससे कि ऐसे अभिलेख तक पँहुच को सुलभ बनाया जा सकें ।


सूचनाओं का स्वैच्छिक प्रकटन धारा 4(1) बी, तथा धारा 4 (2), 4(3) तथा 4(4)
प्रत्येक लोक प्राधिकारी निम्न 17 बिन्दुओं पर स्वतः ही (suomotu) सूचना प्रकट करेगा -
1-संगठन की विशिष्टियाँ, कृत्य और कर्तव्य
2-अधिकारियों और कर्मचारियों की शक्तियाँ और कर्त्तव्य
3-लोक प्राधिकारी अथवा उसके कर्मियों द्वारा अपने कृत्यों के निर्वहन के लिये धारित तथा प्रयोग किये जाने वाले नियम, विनियम, अनुदेश, निर्देशिका और अभिलेख की सूचना ।
4-नीति बनाने या उसके कार्यान्वयन के सम्बन्ध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिये या उनके प्रतिनिधित्व के लिये विद्यमान व्यवस्था के सम्बन्ध में सूचना
5-दस्तावेजों, जो लोक प्राधिकारी द्वारा धारित या उसके नियंत्रणाधीन है, श्रेणियों (categories) क अनुसार विवरण
6-बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों का विवरण । साथ ही विवरण कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठक जनता के लिये खुली होगी या बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी
7-लोक सूचना अधिकारियों के नाम, पदनाम और अन्य विशिष्टियाँ
8-निर्णय करने की प्रक्रिया (पर्यवेक्षण एवं उत्तदायित्व के स्तर सहित)
9-अधिकारियों और कर्मचारियों की निर्देशिका
10-अपने प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी द्वारा प्राप्त मासिक पारिश्रमिक और उसके निर्धारण की पद्धति
11-प्रत्येक अभिकरण (agency) को आवंटित बजट (सभी योजनाओं, व्यय प्रस्तावों तथा धन वितरण की सूचना सहित)
12-अनुदान / राज सहायता कार्यक्रमों (Subsidy Programmes) के क्रियान्वयन की रीति, जिसमें आवंटित राशि और ऐसे कार्यक्रमों के लाभार्थियों के ब्यौरे सम्मिलित है
13-रियायतों, अनुज्ञा -पत्रों तथा प्राधिकारों के प्राप्तिकर्ताओं के सम्बन्ध में विवरण
14-कृत्यों के निर्वहन के लिये स्थापित मानक /नियम
15-किसी इलैक्ट्रानिक रूप में उपलब्ध सूचना के सम्बन्ध में ब्यौरे
16-सूचना प्राप्त करने के लिये नागरिकों के उपलब्ध सुविधाओं का विवरण । किसी पुस्तकालय या वाचनालय की यदि लोक उपयोग के लिये व्यवस्था की गई हो, तो उसका भी विवरण
17-ऐसी अन्य सूचना जो विहित की जाएं

नोट:-
1-प्रत्येक लोक प्राधिकारी उक्त 17 बिन्दुओं पर सूचनाएं प्रकाशित करने के पश्चात इन प्रकाशनों को प्रत्येक वर्ष अद्यतन करेगा ।
2-प्रत्येक लोक अधिकारी का निरन्तर यह प्रयास रहेगा कि वह स्वप्रेरणा से संसूचना के विभिन्न साधनों के माध्यम से, जिसके अन्तर्गत इन्टरनेट भी है, नियमित अंतरालों पर जनता को उक्त 17 बिन्दुओं के सम्बन्ध में सूचनाओं को उपलब्ध कराने के प्रयास करें,जिससे कि जनता को सूचना प्राप्त करने के लिये इस अधिनियम का कम से कम सहारा लेना पडे ।
3-प्रत्येक लोक प्राधिकारी द्वारा उक्त सभी सामग्री को लागत, स्थानीय भाषा और संसूचना की अत्यन्त प्रभावी पद्धति को ध्यान में रखते हुए, स्थानीय क्षेत्र में प्रसारित किया जाएगा । लोक सूचना अधिकारी इन सूचनाओं को (जहाँ तक संभव हो सके इलैक्ट्रानिक प्रारूप में ) अपने पास रखेगा, ताकि जनसाधारण को ये आसानी से उपलब्ध हो सकें ।
4-प्रत्येक लोक प्राधिकारी द्वारा उक्त 17 बिन्दुओं की सूचनाएं सूचना पट्टों, समाचार पत्रों, लोक उद्घोषणाओं, मीडिया प्रसारणों, इन्टरनेट या किसी अन्य माध्यम से (जिसमें किसी लोक प्राधिकारी के कार्यालय का निरीक्षण भी सम्मिलित है) जनता को उपलब्ध करायी जा सकती है ।


नीतियों एव निर्णयों का प्रकाशन [ धारा 4(1) सी डी]
1-प्रत्येक लोक प्राधिकारी ऐसी महत्वपूर्ण नीतियों की रचना करते समय या ऐसे निर्णयों की घोषणा करते समय जो जनता को प्रभावित करते हो, सभी सुंसगत तथ्यों को प्रकाशित करेगा ।
2-प्रभावी व्यक्तियों को अपने निर्णयों के लिये कारण उपलब्ध करायेगा ।

स्वैच्छिक घोषणा के सम्बन्ध में की गयी व्यवस्था
लोक प्राधिकारियों द्वारा इस अध्याय के अन्तर्गत सूचनाओं के स्वैच्छिक प्रकटीकरण के लिए की गयी व्यवस्था की जानकारी सम्बन्धित विभाग से प्राप्त की जा सकती है ।