जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी
कार्यालय जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी मुजपफरनगर।
विभागाध्यक्ष का नाम – डा0 संजीव कुमार मलिक
विभाग का पता – कार्यालय जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी
जिला चिकित्सालय मुजपफरनगर।
दूरभाश नम्बर – 0131244242
1– जन सूचना अधिकारी का नाम – जिला होम्योपैथिक अधिकारी
2– अपीलीय अधिकारी का नाम – निदेषक होम्योपैथी 8वां तल इन्दिरा
भवन लखनउ
दूरभाश नम्बर– 0522–2287081
जनता के लिये चलाये जा रहे कार्य – जनता को स्वास्थ्य सेवा प्रदान करना
होम्यापैथी क्या है :–
स्वस्थ्य अवस्था में कोई दवा खाने पर षरीर में जो लक्ष्ण प्रकट होन लगते है। वैसे ही लक्ष्ण वाली बीमारी का उस दवा की बहुत थोडी मात्रा के प्रयोग से आराम हो जाने का नाम होम्योपैथी है ।
ज्ैासे स्वस्थ्य षरीर वाले को थोडी आर्सेनिक खिला दी जाये तो हैजे की भांति उल्टी, दस्त, प्यास वगैरह के लक्ष्ण दिखाई देने लगते है। उसी तरह उल्टी, दस्त, प्यास वगैरह के लक्ष्ण हैजे में दिखाई देते है उसे थोडी मात्रा में आर्सेनिक का प्रयोग करने से वह अच्छा हो जाता है।
होम्योपैथी कितने दिनो से है:–
कम से कम दो हजार वर्श पहले समें – समें होम्योपैथी मत का यह बीज मात्र पहले आर्यावत्र्त और प्रचीन ग्रीस में जपा गया था। इसके बाद लगभग 150 वश्र हुए हैनिमैन नाम के एक महात्मा ने जी – जान से कौषिष कर कायदे से इसेी साधना की और अच्छि तरह इसका प्रचार किया जिससे चिकित्सा जगत में एक उलट फोर सा हो गया। साथ ही उनका नाम भी अमर हो गया ।
हैनिमैन कौन थे :–
हैनिमैन का पूरा नाम क्रिश्टियान फेडरिक सैमुअल हैनिमैन था। इनका जन्म 10 अप्रैल 1755 ईस्वी के दिन जर्मन के सैक्सन राज्य के मांरसेन नगर मे मिटटी के बर्तन रंगने वाले एक दरिद्र के घर हुआ था। बडे कश्टो से इन्होने अपनी पढाई पूरी की इनको 10 भाशाओं का ज्ञान था। तथा चिकित्सा–षास्त्र व रसायन विज्ञान के प्रकांड पंडित थे । 24 वर्श की उम्र में उन्होने एम0डी0 की उपाधि प्राप्त कर ली थी। इसके कुछ दिन बाद तक उन्होने डेसडेन अस्पताल में प्रधान चिकित्सक के रूप में कार्य किया कुछ समय बाद उन्होने वह काम छोड दिया और एकान्त में बैठ कर रसायन षास्त्र की खोज की । उन्होने लगातार 6: वर्श तक खोज कर सभी तरह की जांच , गरल विज्ञान (विश–विज्ञान) का अध्ययन कर और खुद ही कितने ही विश खाकर वे इस सिद्वांत पर पहंुचे कि होम्योपैथी ही सच्चाई के अटल पर्वत पर मजबूत बैठी है।
एक बूंद दवा से लाभ क्यों होता है:–
कम से कम सूक्ष्म अंष में बांटी हुई औशधि की भीतरी षक्ति बढ जाती है । तथा उसकी रोग में आराम करने की ताकत अधिक हाक जाती है।
सरकार के माध्यम से विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का विवरण।
1 – इस संस्था द्वारा जनपद मुजपफरनगर में होम्योपैथिक चिकित्सा प्रणाली द्वारा विभिन्न रोगों के उपचार का कार्य किया जाता है।
2 – इस संस्था द्वारा जनपद मुजपफरनगर के ग्रामीण क्षेत्रों में षासन की अनुमति से होम्योपैथिक चिकित्सालयों की स्थापना की गयी है।
3 – संस्था द्वारा सभी होम्योपैथिक चिकित्सालयों में षासनादेष के अनुसार मरीजों से पंजीकरण षुल्क के रूप में 1रू0 की परची बनाई जाती है।
4 – 1रू0 का परची पर सभी होम्योपैथिक चिकित्सालयों में 15 दिन तक नि:षुल्क दवाई वितरित की जाती है।
5 – होम्योपैथिक चिकित्सा प्रणाली में सभी बीमारियों की चिकित्सा मरीज व
बीमारी के लक्षण देख कर की जाती है।
क0सं0 चिकित्सालय का नाम स्थापना वर्ष स्वीकृत पद भवन की स्थिति मुख्यालय से दूरी
1 रा0हो0चि0 मंदौड 71 – 72 4 राजकीय 15 कि0मी0
2 रा0हो0चि0 बनत 75 –76 4 नगर पंचायत 36 कि0मी0
3 रा0हो0चि0 बसेडा 80 – 81 4 किराये पर 28 कि0मी0
4 रा0हो0चि0 छपार 80 – 81 4 किराये पर 14 कि0मी0
5 रा0हो0चि0 ककरौली 80 – 81 4 सरकारी 36 कि0मी0
6 रा0हो0चि0जिलाचिकि0 82 – 83 4 सरकारी शून्य
7 रा0हो0चि0 पुरकाजी 84 – 85 4 धर्मशाला 25 कि0मी0
8 रा0हो0चि0 चन्दसीना 85 – 86 4 पंचायत भवन 28 कि0मी0
9 रा0हो0चि0 सम्भलहेडा 86 – 87 3 पंचायत स्कूल 36 कि0मी0
10 रा0हो0चि0 जानसठ 88 – 89 1 राजकीयसी0एच0सी0 23 कि0मी0
11 रा0हो0चि0 खतौली 90 – 91 1 राजकीयसी0एच0सी0 22 कि0मी0
12 रा0हो0चि0 रोहाना 90 – 91 1 राजकीयसी0एच0सी0 14 कि0मी0
13 रा0हो0चि0 नागल 97 – 98 3 नि:शुल्क 48 कि0मी0
14 रा0हो0चि0 घिस्सूखेडा 97 – 98 3 पंचायत स्कूल 14 कि0मी0
15 रा0हो0चि0 जडौदा 98 – 99 3 नि:शुल्क 8 कि0मी0
16 रा0हो0चि0 शाहपुर 05 – 06 3 राजकीयपी0एच0सी0 22 कि0मी0
17 रा0हो0चि0 शुक्रताल 08 – 09 3 जाट धर्मषाला 30 कि0मी0
जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी
मुजपफरनगर।