विभागाध्यक्ष का पदनाम

परियोजना निदेशक

विभाग का पताजिला ग्राम्य विकास अभिकरण
विकास भवन,
मुजफ्फरनगर।

दूरभाष01312621246
फैक्स01312621610
ईमेल -drda-muz@nic.in
1जन सूचना अधिकरी का नाम - श्री विक्रम सिंह

2सहायक जन सूचना अधिकारी का नाम - श्री संजीव कुमार दुआ
3 अपीलीय अधिकारी का नाम- श्री मनोज कुमार सिंह,आयुक्त,
ग्राम्य विकास, उत्तर प्रदेश,
10वां तल जवाहर भवन
लखनऊ।

दूरभाष/फैक्स05222286025
ईमेल -crd-up@nic.in


विभाग की वैबसाईट -www.rd.up.nic.in

राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी योजना

ग्रामीण क्षेत्रो के रोजगार प्राप्त करने के इच्छुक परिवारो के सदस्यो को रोजगार उपलब्ध कराने हेतु भारत सरकार द्वारा संचालित राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी अधिनियम2005 के अन्तर्गत उत्तर प्रदेश में 02 फरवरी 2006 से राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी योजना प्रारम्भ की गयी है, इस योजना में वर्ष 2001 से चलाई जा रही सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना (एस0जी0आर0वाई0) तथा वर्ष 200405 से संचालित राष्ट्रीय काम के बदले अनाज कार्यक्रम (एन0एफ0एफ0डब्ल्यू0पी0) को समाहित किया गया है।
उत्तर प्रदेश में प्रथम चरण में 02 फरवरी 2006 को इस योजना में पूर्वी/मध्य क्षेत्र के 22 जिलो को सम्मिलित किया गया। तत्पश्चात् 17 नये जनपदो को इस योजना के अन्तर्गत आच्छादित किया गया और मार्च 2008 तक यह योजना प्रदेश के कुल 39 जिलो में संचालित की जा रही थी।
वर्तमान में भारत सरकार द्वारा 01 अपै्रल 2008 से देश के समस्त जिलो में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी योजना का शुभारम्भ किया गया है। इसी के तहत उत्तर प्रदेश के समस्त 71 जनपदो में यह योजना लागू कर दी गयी है।
योजना के उद्देश्य:
इस योजना के मुख्य उद्देश्य निम्नवत् है:
ग्रामीण क्षेत्रो में श्रम पर आधारित कार्य करने के इच्छुक परिवारो को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराना।
रोजगार सृजन के साथसाथ ग्रामों में आवश्यकता के अनुसार स्थायी उत्पादक परिसम्मपत्तियों का सृजन करना।
पर्यावरण की सुरक्षा।
ग्रामीण क्षेत्रो से शहरो की तरफ पलायन को रोकना।
गरीबो के मौलिक कारणो को कम करना।
राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी अधिनियम् के मुख्य बिन्दु:
राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी अधिनियम कोई योजना नही है। यह एक वैद्यानिक प्राविधान है।
राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी अधिनियम के प्राविधानो एवं क्रियान्वयन का प्रमुख दायित्व पंचायतीराज संस्थाओ को है।
बी0पी0एल0 तथा ए0पी0एल0 परिवारो का अधिनियम में कोई बन्धन नही है।
लोगो को ग्राम्य विकास तथा रोजगार से सम्बन्धित अपनी समस्याओ एवं शिकायतो को पेश करने का मौका दिया गया है।
संस्थागत मशीनरी के माध्यम से पारदर्शिता, जवाबदेही, सामाजिक अंकेक्षण एवं जन सहभागिता को सुनिश्चित किया गया है।
श्रमिको को अपने घर से 05 कि0मी0 के दायरे में रोजगार दिया जायेगा अन्यथा अतिरिक्त मजदूरी देना होगा।
कराये जाने वाले कार्यो पर मजदूरी एवं सामग्री का अनुपात 60 : 40 होना चाहिए।
राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी अधिनियम् के अन्तर्गत व्यक्तियो/मजदूरो को प्राप्त अधिकार:
रोजगार की मांग करने का अधिकार।
रोजगार की मांग किये जाने पर 15 दिन के अन्दर रोजगार प्राप्त किये जाने का अधिकार।
15 दिन के अन्दर रोजगार न मिलने पर बेराजगारी भत्ता पाने का अधिकार।
कार्यस्थल पर कार्य करते समय स्वच्छ पेयजल, छाया, उपचार तथा बच्चो के लिए देखभाल सुविधा प्राप्त करने का अधिकार।
राज्य में वैद्यानिक निर्धारित मजदूरी दर को प्राप्त करने का अधिकार।
समय से मजदूरी का भुगतान न होने पर वेतन भुगतान कानून के अन्तर्गत मुवाअजा पाने का अधिकार।
परिवारों की पात्रता:
योजना के अन्तर्गत पंजीकरण के लिए परिवार स्थानीय निवासी हो। स्थानीय का मतलब है कि आवेदक ग्राम पंचायत के भीतर ही रहता हो। उस इलाके के प्रवासी परिवारो को भी स्थानीय निवासी की श्रेणी में ही रखा जायेगा, जो परिवार कुछ समय पहले वहाँ से जा चुके हो, लेकिन जिनके लौट आने की सम्भावना अभी भी बची हुई है, वह भी इस प्राविधान का लाभ उठा सकते है।
परिवार का आशय माता, पिता और उनके बच्चो यानि एकल परिवार से है। किसी ऐसे व्यक्ति को भी परिवार में शामिल माना जा सकता है, जो पूरी तरह या आंशिक रूप से परिवार के मुख्या पर आश्रित है। अगर किसी परिवार में केवल एक सदस्य है, तो उसे भी एक परिपूर्ण परिवार की श्रेणी में रखा जायेगा।
परिवार का प्रत्येक व्यस्कसदस्य, जो कि श्रम पर आधारित कार्य करने का इच्छुक है, इस अधिनियम के अन्तर्गत मजदूरी पा सकता है।
बी0पी0एल0/ए0पी0एल0 का इसमें कोई बन्धन नही है।
देय रोजगार दिवसो की गणना का आधार परिवार है, न कि व्यक्ति।
एक परिवार को एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों का रोजगार दिया जाये।
परिवारो के चयन की प्रक्रिया:
प्रत्येक व्यक्ति सादे कागज/निर्धारित प्रारूप पर प्रार्थना पत्र फोटो सहित अपनी ग्राम पचंायत को प्रस्तुत करेंगा।
प्रार्थना पत्र में वह अपने परिवार के अन्य कार्य करने के इच्छुक व्यस्कसदस्यो का भी विवरण देगा।
ग्राम पचंायत द्वारा प्राप्त प्रार्थना पत्र का परीक्षण करावाया जायेगा। इसका उद्देश्य दिये गये विवरण की सत्यता की जाँच करना है।
जाँच में सही पाये जाने पर ऐसे प्रार्थना पत्रों का पंजीकरण ग्राम पंचायत स्तर पर किया जायेगा तथा परिवार को एक पंजीकरण कार्ड उपलब्ध करा दिया जायेगा।
ग्राम पंचायत स्तर पर पंजीकरण रजिस्टर तैयार होगा।
परिवारो के पंजीकरण की सूचना अग्रिम कार्यवाही हेतु ब्लाक/जनपद स्तर पर कार्यरत क्रमश: कार्यक्रम अधिकारी (बी0डी0ओ0) एवं जिला कार्यक्रम समन्वयक (सी0डी0ओ0) को भेज दी जायेगी।
जॉबकार्ड की व्यवस्था:
पंजीकरण होने के एक सप्ताह के अन्दर यह जॉबकार्ड पंचायत द्वारा निर्धारित प्रारूप पर जारी किया जायेगा।
पंजीकृत परिवार के समस्त कार्य करने के इच्छुक व्यस्कसदस्यो के फोटो एक जॉबकार्ड परिवार को ग्राम पचंायत द्वारा उपलब्ध कराया जायेगा।
यह एक वैद्यानिक दस्तावेज है, जो कि 05 वर्षो के लिए मान्य होगा।
ग्राम पंचायत द्वारा पंजीकरण पंजिका, जॉबकार्ड में किसी भी प्रकार के परिवर्तन को ग्रासभा की बैठक में अनुमोदित कराना होगा।
कार्य की उपलब्धता:
पंजीकृत परिवारो को उनके प्रार्थना पत्र प्राप्त होने पर 15 दिनों के अन्दर रोजगार देना होगा।
ऐसे जिन लोगो को रोजगार दिया जायेगा, उनमें एक तिहाई महिलाएं होगी।
एक बार में कम से कम 14 दिनों का रोजगार पाने हेतु आवेदन किया जायेगा।
कार्य हेतु प्रार्थना पत्र ग्राम पंचायत अथवा कार्यक्रम अधिकारी को प्रस्तुत करना होगा।
कार्य प्रारम्भ होने की तिथि की सूचना ग्राम पचंायत एवं जिला स्तर पर नोटिस के रूप में लगायी जायेगी।
कार्य गाँव के 05 कि0मी0 की परिधि में कराये जाने को वरियता दी जायेगी।
कोई नया कार्य तभी प्रारम्भ किया जायेगा जबकि कम से कम 10 व्यक्तियों को उक्त प्रोजेक्ट के अन्तर्गत कार्य दिया जा सके।
पूर्व से कराये जा रहे कार्यो ; वद हवपदह चतवरमबजेद्ध पर व्यक्तियो को एक्ट के अन्तर्गत रोजगार उपलब्ध कराना प्रतिबन्धित है।
यदि कार्यदायी संस्थाओं के द्वारा कार्य 05 कि0मी0 की परिधि से बाहर कराये जाते है, तो कार्य करने वाले मजदूरो को 10 प्रतिशत मजदूरी अतिरिक्त देने की व्यवस्था एक्ट में की गयी है।
महिलाओ तथा वृद्वाें को उनके निवास स्थान के आसपास काम उपलब्ध करवाना होगा।
मजदूर द्वारा कार्य प्राप्त करने की प्रक्रिया:
प्रत्येक मजदूर, जो कार्य करने का इच्छुक है, सर्वप्रथम ग्राम पंचायत में अपना पंजीकरण करायेगा। यह पंजीकरण 05 वर्ष में सिफ‍र् एक बार ही कराना होगा।
प्रत्येक मजदूर को कार्य करने के लिए आवेदन करना होगा और यह आवेदन हर जितनी बार कार्य की जरूरत पडे़, उतनी बार देना होगा।
एक बार में कम से कम 14 दिनों का रोजगार पाने हेतु आवेदन किया जायेगा।
कार्य हेतु प्रार्थना पत्र ग्राम पचंायत अथवा कार्यक्रम अधिकारी को प्रस्तुत करना होगा।


मजदूरी की दर:
एक्ट के अन्तर्गत केन्द्र सरकार द्वारा समयसमय पर विभिन्न क्षेत्रों के लिए मजदूरी की दर निर्धारित की जायेगी, जो किसी दशा में 60/ रूपयें से कम न होगी। वर्तमान में न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948 के सेक्शन3 के अन्तर्गत राज्य सरकार द्वारा कृषि श्रमिको के लिए निर्धारित 100/ रूपयें प्रति दिन की दर से मजदूरी देय है। मजदूरी का भुगतान 15 दिनों के भीतर किया जाना है। महिला तथा पुरूष को समान दर से मजदूरी देय होगी। अगर मजदूरो को 15 दिन के अन्दर भुगतान नही प्राप्त होगा तो वेतन भुगतान कानून, 1936 के अनुसार मजदूर को मुवाअजा पाने का हक होगा। कुशल श्रमिको एवं कारीगरों को मजदूरी का भुगतान सामग्री अंश से किया जायेगा।
मजदूरी भुगतान करने के लिए दो प्रकार कि विधि प्रचलन में है। प्रथम पीसरेट, जिसके अन्तर्गत भुगतान नपती के आधार पर किया जाता है। यह व्यवस्था आंध्र प्रदेश तथा राजस्थान में लागू है। दूसरा टाईम रेट, जिसके अन्तर्गत भुगतान निर्धारित समय (08 घण्टों का जिसमें 01 घण्टा अवकाश का है) के अन्दर न्यूनतम निर्धारित कार्य करने के उपरान्त निर्धारित मजदूरी का भुगतान किया जाता है। यह व्यवस्था उत्तर प्रदेश में लागू है।
बेरोजगारी भत्ते का भुगतान:
यदि किसी व्यक्ति को प्रार्थना पत्र देने के 15 दिनों के अन्दर रोजगार उपलब्ध नही कराया जाता है तो ऐसे व्यक्ति को निर्धारित दर से प्रतिदिन बेरोजगारी भत्ता देना होगा। यदि किसी व्यक्ति को 100 दिनो से कम का रोजगार दिया जाता है तो शेष अवधि हेतु:
एक वित्तीय वर्ष में प्रथम 30 दिनों हेतु बेरोजगारी भत्ते की दर कुल मजदूरी की दर की एक चौथाई होगी।
वर्ष के शेष दिनो हेतु यह दर मजदूरी की दर की आधी होगी।
बेरोजगारी भत्ते का भुगतान 15 दिनो के अन्दर किया जाना होगा।
बेराजगारी भत्ता कब देय नही होगा:
वह व्यक्ति जिसने कार्य के लिए आवेदन किया है या उसके परिवार के कोई भी सदस्य कार्य स्थल पर उपस्थित नही होता है, तो उसको बेरोजगारी भत्ता प्राप्त नही होगा।
वह अवधि समाप्त हो जाये, जिसके लिए उसने रोजगार की माँग की है।
भत्ता पाने वाले व्यक्ति/परिवार का किसी एक वित्तीय वर्ष में 100 दिवस के काम का कोटा समाप्त हो गया हो।
कार्यस्थल पर उपलब्ध सुविधाएँ:
कार्यस्थल पर जरूरी सुविधाआें की व्यवस्था जैसे चिकित्सीय सहायता, स्वच्छ पेयजल, आराम के लिए छाया, 06 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए, 05 या उससे अधिक बच्चे हो तो बालवाड़ी की व्यवस्था।
कार्यस्थल पर 05 या उससे अधिक संख्या में यदि ऐसी महिलाएं कार्य कर रही है जिनके पास 06 वर्ष से कम उम्र के बच्चे हो तो उनमें से एक महिला मजदूर को छोटे बच्चे की देखभाल का कार्य सौंपा जायेगा और उसे शेष मजदूरो के समान ही मजदूरी दी जायेगी।
कार्यस्थल पर शारीरिक नुकसान होने पर उपलब्ध विशेष सुविधायें:
अगर कोई मजदूर कार्य स्थल पर कार्य के दौरान किसी भी तरह से दुघर्टना से घायल होता है तो उसे योजना के अन्तर्गत नि:शुल्क चिकित्सा उपलब्ध करायी जायेगी।
अगर उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़े तो उसे अस्पताल में रहने व उपचार से सम्बन्धित सभी खर्चो का वहन सरकार द्वारा किया जायेगा। साथ ही प्रतिदिन की मजदूरी का आधा पैसा भी उसे प्राप्त होगा।
यदि कार्यस्थल पर किसी मजदूरी की मौत हो जाये या अपंग हो जाये तो निम्न धनराशि देय होगी:
कार्यरत व्यक्ति दुघर्टना के फलस्वरूप मृत्यु होने पर 25000/ रूपयें।
स्थायी या पूर्ण अपंग होने पर 25000/ रूपयें।
हाथपैर या आँख अक्षम होने पर 15000/ रूपयें।
एक हाथ या एक पैर अक्षम होने पर 10000/ रूपयें।
राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी योजना के अन्तर्गत प्रमुखता के आधार पर किये जाने वाले कार्य:
1जल संरक्षण एवं जल संग्रहण।
2अकाल से बचाव, वृक्षारोपण, वनरोपण।
3सिंचाई हेतु नहर एवं सूक्ष्म व लघु सिंचाई के कार्य।
4भूमि सुधार या इन्दिरा आवास योजना के तहत अनुसूचित जाति तथा अनसूचित जनजाति के लाभार्थी परिवारो को सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध करवाने वाले कार्य।
5परमपरागत जल स्रोतो का नवीनीकरण एवं पोखरो तालाबो की मिट्टी हटाना।
6भूमि विकास।
7बाढ़ नियन्त्रण व बचाव के कार्य, जिसमें पानी जमा होने वाले इलाको से पानी निकास की व्यवस्था भी शामिल है।
8ग्रामीण इलाको को जोड़ने के लिए सड़को का निर्माण।
9अन्य कार्य राज्य/केन्द्र सरकार के निर्देशानुसार।
योजनाओं का नियोजन एवं क्रियान्वयन:
एक्ट के अन्तर्गत योजना के नियोजन एवं क्रियान्वयन का दायित्व जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत तथा ग्राम पचंायतो को सौपा गया है।
अग्राम पचंायत के मुख्य कार्य/दायित्व:
ग्रामसभा की कार्य संस्तुतियों के आधार पर योजनावार कार्यो का चिन्हीकरण कर प्रस्ताव तैयार करना होगा। प्रस्तावो को कार्यक्रम अधिकारी को स्वीकृति प्राप्त करने के लिए भेजा जायेगा। स्वीकृति के उपरान्त कार्यो का क्रियान्वयन एवं सुपरविजन करना होगा। कार्यक्रम अधिकारी द्वारा ग्राम पंचायत क्षेत्र में स्वीकृत अन्य कार्यो का क्रियान्वयन एवं सुवरविजन करना होगा। ग्रामसभा की कार्य संस्तुतियों के आधार पर एक विकास प्लान तैयार करना तथा शैल्फ आफ प्रोजेक्टस तैयार रखा जायेगा रोजगार की माँग के आधार पर कार्यो को क्रियान्वित करना तथा सुपरविजन करना होगा। ग्राम पचंायत द्वारा कम से कम 50 प्रतिशत कार्यो (कुल लागत के रूप में) का क्रियान्वयन कराना होगा। कार्यो के क्रियान्वयन हेतु कार्यक्रम अधिकारी से बजट का आवंटन प्राप्त करना होगा। कार्यो का क्रियान्वयन आवश्यक तकनीकी मानको के अनुसार कराया जायेगा।
बक्षेत्र पंचायत के मुख्य कार्य/दायित्व:
अन्तिम अनुमोदन हेतु अनुमोदित ब्लाक प्लान को जिला पंचायत को भेजा जायेगा। आवश्यकतानुसार क्षेत्र पंचायत द्वारा कराये जाने वाले कार्यो को भी उक्त प्लान में सम्मिलित किया जायेगा। क्षेत्र पंचायत एवं ग्राम पंचायत स्तर पर लिये गये प्रोजेक्टस का सुपरविजन एवं मॉनीटिरिंग राज्य सरकार गारन्टी कौन्सिल ; ैम्ळब्द्ध द्वारा समयसमय पर दिये गये निर्देशो के क्रम में किया जायेगा।

सजिला पंचायत के मुख्य कार्य/दायित्व:
ब्लाकवार शैल्फ आफ प्रोजेक्टस को अन्तिम रूप देते हुए अनुमोदित किया जायेगा। आवश्यकतानुसार जिला पंचायत द्वारा कराये जाने वाले कार्यो को भी उक्त प्लान में सम्मिलित किया जायेगा। ब्लाक एवं जिला स्तर पर लिये गये कार्यो का सुपरविजन एवं मॉनीटिरिंग राज्य सरकार गारन्टी कौन्सिल ; ैम्ळब्द्ध द्वारा समयसमय पर दिये गये निर्देशो के क्रम में किया जायेगा।
योजना के अन्तर्गत पारदर्शिता व जवाबदेही की व्यवस्था:
कार्यक्रम की देररेख करने के उद्देश्य से स्थानीय समुदाय को सम्मिलित करने के लिए प्रत्येक गाँव में स्थानीय निगरानी एवं सर्तकता समितियों का गठन किया जायेगा।
क्रियान्वयन एजेन्सी ग्राम स्तरीय सर्तकता एवं मूल्यांकन समिति को कार्य का स्वरूप, समय सीमा एवं गुणवत्ता के माप दण्डो से अवगत करायेगी।
ग्राम स्तर पर ग्रामसभा द्वारा प्रत्येक कार्य की निगरानी की जायेगी।
प्रत्येक पंजीकृत मजदूर को उसकी मांग के अनुसार जॉब उपलब्ध कराया जायेगा।
जॉबकार्ड के आधार पर रोजगार की मांग करने वाले आवेदक को रोजगार मिल सके, ग्राम सभा द्वारा पंजीकरण की प्रक्रिया, जॉबकार्ड का वितरण तथा मजदूरी का निर्धारित समय पर भुगतान की प्रक्रिया की समीक्षा की जायेगी।
रोजगार से सम्बन्धित सभी दस्तावेजो को जनता के निरीक्षण के लिए उपलब्ध कराना होगा।
हर व्यक्ति को इन दस्तावेजो की प्रति पाने का हक होगा।
ग्राम पचंायत कार्यक्रम अधिकारी के कार्यालयो में शुल्क देकर मस्टर रोल की प्रतिया निरीक्षण के लिए उपलब्ध होगी।
ग्राम पंचायत सभी सम्बन्धित दस्तावेज ग्राम सभा को उपलब्ध करायेगी ताकि वे सोशल आडिट कर सके।
सूचना का अधिकार और राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी अधिनियम2005
राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी योजना वास्तव में एक ऐसी योजना है जिसमें सूचना का अधिकार अन्तर्निहित है। निम्न तत्वो को अनिवार्य बनाकर सूचना का अधिकार योजना का अनन्य भाग बना दिया गया है।
योजना की प्र्रगति ग्रामसभा को प्रत्येक स्तरो पर देने का प्राविधान है।
सामाजिक अंकेक्षण की व्यवस्था।
भौतिक अंकेक्षण।
अग्राम पंचायत तथा कार्यक्रम अधिकारी द्वारा सार्वजनिक की जाने वाली सूचनाएं:
कार्यक्रम अधिकारी का नाम तथा पता।
जॉबकार्ड धारको की सूची।
चिन्हित कार्यो की सूची।
कराये गये कार्यो की सूची (कार्य, स्थल, दिनांक, लागत, श्रमिको की संख्या आदि सहित)।
कार्य, स्थल, कार्य की तिथियों सहित उन व्यक्तियों की सूची, जिन्हें कार्य में लगाया गया है।
न्यूनतम मजदूरी का विवरण।
एन0आर0ई0जी0एस0 का परिसम्पत्ति रजिस्टर।
भुगतान की गयी मजदूरी का विवरण (नगद तथा खाद्यान्न)।
बग्राम पचांयत तथा कार्यक्रम अधिकारी से मांगी जा सकने वाली सूचनाएं:
निम्न सूचनाएं यदि ग्रामसभा के सूचना पट्ट पर पूर्व में प्रदर्शित नही की गयी है:
मस्टररोल।
ग्रामसभा की बैठक का कार्यवृत्त।
ऐसे व्यक्तियो की सूची जिनके आवेदन निरस्त किये गये।
सामाजिक अंकेक्षण का प्रतिवेदन।
आडिटर की रिपोर्ट
उन व्यक्तियो की सूची जिन्हें बेराजगारी भत्ता दिया जा रहा या वे इसके पात्र है।
रोजगार सम्बन्धी अभिलेख।
आंगणन।
कार्य का निरीक्षण।
सनागरिको की जिम्मेदारियां/अपेक्षाएं:
ग्रामसभा की बैठक में भागीदारी करना तथा कराये जाने वाले कार्यो को प्रस्तावित करना।
सामाजिक अंकेक्षण में भागीदारी करना।
स्थानीय लोगो को जागरूक करना तथा योजना में शामिल होने वालो की मद्द करना।
राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी अधिनियम2005 के अन्तर्गत सोशल आडिट:
अधिनियम के तहत सोशल आडिट एक अति महत्वपूर्ण कार्य है, जो सतत सार्वजनिक सर्तकता का एक साधन है। अधिनियम के सेक्शन 17 में ग्राम पंचायत के अधीन होेने वाले कार्यो के क्रियान्वयन का अनुश्रवण तथा योजनान्तर्गत ग्राम पंचायतो द्वारा ली जाने वाली परियोजनाओ का नियमित सोशल आडिट करने का उत्तरदायित्व ग्रामसभा का है। भारत सरकार द्वारा जारी आपरेशनल गाईड लाईन के सैक्शन 11.2 से 11.6 तक सोशल आडिट के विषय में विस्तार से कहा गया है कि सोशल आडिट क्या है, कौन करायेगा, क्या प्रक्रिया होगी और प्राप्त निष्कर्षो पर किस प्रकार कार्यवाही होगी आदि। सोशल आडिट के अन्तर्गत प्रमुख सचिव, ग्राम्य विकास, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा शासनादेश संख्या 243 दिनंाक 2692006 निर्गत किया गया जिसके अनुसार निम्नलिखित 11 चरणो के अन्तर्गत आडिट किये जाने के निर्देश है:
1परिवारो का पंजीकरण।
2जॉबकार्डो का वितरण।
3कार्य हेतु आवेदन पत्रों की प्राप्ति।
4शैल्फ आफ प्रोजेक्ट की तैयारी तथा कार्यस्थलो का चयन।
5तकनकी आंकलन कार्य आदेश का अनुमोदन तथा उसका निर्गमन।
6कार्य का आवंटन।
7कार्यो का क्रियान्वयन तथा पर्येवेक्षण।
8बेरोजगारी भत्ते का वितरण।
9मजदूरी का भुगतान।
10कार्यो का मूल्यांकन।
11ग्रामसभा में अनिवार्य सोशल आडिट (सोशल आडिट फोरम)।

उपरोक्त सभी चरणों के अन्तर्गत क्रियान्वयन के समय विभिन्न प्रकार से प्रक्रिया के पालन में विचलन को रोकने तथा उन्हें दूर करने हेतु प्रत्येक स्तर पर सतर्कता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित किये जाने की आवश्यकता है। ग्राम पंचायत स्तर पर सतर्कता एवं अनुश्रण समितियों तथा सोशल आडिट फोरम को सोशल आडिट के लिए सक्रिय करने की आवश्यकता है।



स्थानीय स्तर पर रखे जाने वाले अभिलेख:
1जॉबकार्ड रजिस्टर।
2रोगजार की मांग के लिए रजिस्टर।
3रोजगार रजिस्टर।
4परिसम्पित्ति रजिस्टर।
5मस्टर रोल।
6शिकायत पुस्तिका।
7बेरोजगारी रजिस्टर।
8भुगतान रजिस्टर।
9कार्यस्थल पर निरीक्षण पुस्तिका।
राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी अधिनियम के अन्तर्गत मानीटरिंग:
अधिनियम के अन्तर्गत यह व्यवस्था भी की गयी है कि योजना के अन्तर्गत कराये गये कार्यो की गुणवत्ता एवं इसके क्रियान्वयन के विभिन्न पहलुओ पर निगरानी रखी जाये तथा केन्द्र राज्य एवं जिला स्तरो पर बाहरी मानीटर्स के जरिये भौतिक सत्यापन एवं गुणवत्ता आडिट कराया जाये। इस हेतु ग्रामीण विकास मन्त्रालय भारत सरकार के स्तर से राष्ट्रीय गुणवत्ता मानीटर्स नियुक्त किये गये है। राज्य एवं जिला स्तर पर राज्य सरकार की सहमति से राज्य एवं जिला गुणवत्ता मानीटर्स नियुक्त करने की व्यवस्था है।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कुछ संस्थाओ को राज्य गुणवत्ता मानीटर्स (एस0क्यू0एम0) नियुक्त किया गया है इसमें राज्य ग्राम्य विकास संस्थान भी एक है। इसके साथ ही शासन द्वारा मानीटर्स के प्रशिक्षण आदि की व्यवस्था का दायित्व संस्थान को सौंपा गया है।
राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी कार्यक्रम का संचालन:
वैद्यानिक क्रियान्वयन ऐजेंसी:
ग्राम्य विकास विभाग योजना के क्रियान्वयन हेतु नोडल विभाग होगा।
जिला क्षेत्र एवं ग्राम पचंायत अपने क्षेत्रान्तर्गत योजना बनाने तथा क्रियान्वयन हेतु प्रमुख संस्थाये होगी।
मुख्य विकस अधिकारी जिला कार्यक्रम समन्वयक तथा जिला विकास अधिकारी अतिरिक्त जिला कार्यक्रम समन्वयक विनिर्दिष्ट किये जाते है।
जिले में योजना के सफल क्रियान्वयन हेतु जिला कार्यक्रम समन्वयक पूर्ण रूप से उत्तरदायी होगे।
क्षेत्र पचंायत स्तर पर खण्ड विकास अधिकारी कार्यक्रम अधिकारी के रूप में कार्य करेंगे।
ग्राम्य विकास विभाग द्वारा जिला कार्यक्रम समन्वयक तथा कार्यक्रम अधिकारी को योजना के सफल क्रियान्वयन हेतु आवश्यक वित्तीय एवं प्रशासकीय शक्तियॉ प्रत्यायोजित की जायेंगी।
योजना का व्यापक प्रचारप्रसार:
स्थानीय भाषा में आसानी से पठनीय सामग्री।
मल्टीमिडिया संचार के माध्यम से व्यापक अभियान।
स्थानीय विभिन्न सांस्कृतिक एवं लोक कला के माध्यम से प्रचारप्रसार।
स्थानीय स्तर पर संवाद एवं गोष्ठियां।
योजना में पारदर्शिता हेतु सूचना के अधिकार को इस योजना में लागू किया जाना।
रोजगार की मांग का आकलन:
ग्राम पचंायतद्वारा ग्रामसभा की बैठक आयोजित कर रोजगार की मांग का आकलन किया जायेगा। आंकलन करते समय यह अवश्य ध्यान रखा जायेगा कि गैर कृषि मौसम (लीन एग्रीकल्चर पीरियड) के तीन माह में रोजगार की मांग को आधार मानते हुए रोजगार की वार्षिक मांग का आकलन किया जाये।
पंजीकरण की प्रक्रिया:
पंजीकरण एवं जाबकार्ड तैयार करने हेतु कार्यक्रम अधिकारी द्वारा ग्राम पचंायत को सहायता प्रदान की जायेगी। पंजीकरण हेतु भारत सरकार की आपरेशनल गाईड लाईन में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जायेगा।
रोजगार पत्र (जॉबकार्ड):
पंजीकृत परिवारों में ग्राम पंचायत द्वारा रोजगार पत्र (जॉबकार्ड) जारी किया जायेगा, जिसमें व्यस्क सम्बन्धियों का पूर्ण विवरण एवं अकुशल श्रम हेतु परिवार के इच्छुक सदस्यो के फोटोग्राफ होगा। यह रोजगार पत्र जारी होने के दिनांक से 5 वर्ष के लिए वैध होगा तथा प्रत्येक 5 वर्ष की समाप्ति के पश्चात एम माह के अन्दर इसे ग्राम पंचायत द्वारा नवीनीकृत किया जायेगा।
जॉबकार्ड प्राप्त न होने पर जारी किये गये किसी भी जॉबकार्ड पर अथवा जॉब कार्ड की प्रविष्टि पर आपत्ति होने पर कोई भी आपत्तिकर्ता संबंधित ग्रामक पचंायत के प्रधान के समक्ष आपत्ति प्रस्तुत कर सकता है तथा ग्राम प्रधान द्वारा एक सप्ताह में आपत्ति का निराकरण कर आपत्तिकर्त को अवगत कराया जायेगा।
ग्राम प्रधान के निर्णय से असंतुष्ट होने पर क्षेत्र के कार्यक्रम अधिकारी को 15 दिवस में अपील प्रस्तुत की जा सकेगी। कार्यक्रम अधिकारी द्वारा यथोचित जांच के उपरान्त एक सप्ताह में अपील का निराकरण करना होगा। यदि आपत्तिकर्ता कार्यक्रम अधिकारी के निर्णय से असंतुष्ट हो तो जिलाधिकारी के समक्ष अपील कर सकता है, जिसका निर्णय अन्तिम रूप से मान्य होगा।
रोजगार हेतु आवेदन:
ग्राम पचंायत द्वारा पंजीकृत प्रत्येक परिवार, जिसके नाम से रोजगार पत्र जारी किया गया है, का वयस्क सदस्य योजनान्तर्गत अकुशल मानव श्रम हेतु आवेदन करने का पात्र होगा।
प्रत्येक परिवार का वयस्क सदस्य, जो कि ग्रामीण क्षेत्र में निवास करता है एवं अकुशल मानव श्रम को स्वेच्छा से करने हेतु तैयार है, वह अपना नाम, उम्र एवं पता सहित आवेदन ग्राम पचंायत को प्रस्तुत करेगा।
आवेदन का प्रारूप, पंजीयन एवं आवेदन प्राप्त होने पर समयावधि में कार्यवाही से सम्बन्धित निर्देश योजनान्तर्गत निर्गत भारत सरकार की गाईड लाइन्स के अनुरूप होगें।
रोजगार की उपलब्धता:
ग्राम पंचायत द्वारा रोजगार हेतु प्राप्त आवेदन पत्रों के परीक्षण उपरान्त तथा यह सुनिश्चित करने के उपरान्त कि आवेदक द्वारा पंजीकरण कराया जा चुका है, ग्राम पचंायत आवेदक को स्वीकृत कार्यस्थल पर उपस्थित होने हेतु निर्देशित करेगी।
रोजगार हेतु आवेदन पत्र प्राप्त होने पर ग्राम पचंायत क्षेत्रान्तर्गत पूर्व से जारी रोजगार मूलक कार्यो पर आवेदक को उपस्थित होने हेतु निर्देशित करेगी, अन्यथा पंचायत स्तर पर उपलब्ध शेल्फ आफस प्रोजेक्ट में से कार्य आरम्भ करते हुए रोजगार उपलब्ध कराने अथवा अन्य क्रियान्वयन एजेंसी द्वारा क्रियान्वित किये जा रहे कार्यो पर रोजगार उपलब्ध करकाने की कार्यवाही करेगी।
रोजगार हेतु आवेदन प्राप्त होने पर रोजगार उपलब्ध कराने का निर्णय ग्राम पंचायत/कार्यक्रम अधिकारी द्वारा लिया जायेगा।
यह प्रयास किया जायेगा कि आवेदक द्वारा दर्शाये गये निवास के स्थान (ग्राम पचंायत) के 05 कि0मी0 की परिधि में ही उसे रोजगार उपलब्ध हो जाये तथा यदि उक्त परिधि में रोजगार उपलब्ध न हो तो ग्राम पंचायत द्वारा उक्त आवेदन पत्र को कार्यक्रम अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया जायेगा जो कि विकास खण्ड के अन्तर्गत रोजगार कार्यस्थल पर उपस्थित होने के लिए आवेदक को सूचित करेगा। इस हेतु रोजगार पर लगे श्रमिक को परिवहन एवं अन्य व्यय हेतु न्यूनतम मजदूरी का 10 प्रतिशत अतिरिक्त भुगतान किया जायेगा।
ग्राम पचंायत एवं कार्यक्रम अधिकारी द्वारा रोजगार उपलब्ध कराये जाने हेतु प्रक्रिया का निर्धारण भारत सरकार द्वारा निर्गत योजना की आपरेशनल गाईड लाईन के अनुरूप तथा ग्राम्य विकास विभाग द्वारा निर्गत निर्देशो के अनुसार किया जायेगा।
आवश्यक अभिलेखो का संधारण:
पंजीयन/जॉब कार्ड पंजी, रोजगार आवेदन पंजी, रोजगार पंजी, मस्टर रोल, माप पुस्तिका, परिसम्पत्ति पंजी, मजदूरी भुगतान पंजी, सामाजिक अंकेक्षण पंजी, कार्यस्थल पर निरीक्षण पुस्तिका, शिकायत पुस्तिका, बेरोजगारी भत्ता पंजी निर्धारित प्रारूप में संधारित की जावेगी।
योजनान्तर्गत निम्नलिखित कार्यो को प्राथमिकता के आधार पर लिया जायेगा:
जल संवर्धन एवं संरक्षण सूखे की रोकथाम (वनीकरण एवं पौधारोपण सहित) ;क्तवनहीज च्तववपिदह पदबसनकपदह ं​िवितमेजंजपवद ंदक जतमम चसंदजंजपवदद्ध
सिंचाई, नहर (माईक्रो एवं लघु सिंचाई कार्यो सहित)
इंदिरा आवास योजना के अन्तर्गत लाभान्वित हितग्राहियों की अथवा भूमि सुधार के हितग्राही अथवा अनु0जा0/अ0ज0जा0 के व्यक्तियों द्वारा धारित भूमि पर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना।
परम्परागत जल स्रोत संरचनाओं का पुनरोद्धार (तालाबो सेगाद निकालने सहित) नाली निर्माण।
भूमि विकास के कार्य।
बाढ़ नियन्त्रण एवं जल निकासी संबंधी कार्य।
सर्वऋतु सम्पर्क मार्ग का निर्माण
उक्त साकेतिक सूची में उल्लिखित कार्यो के अतिरिक्त स्थानीय परिसम्पतियों व क्षेत्रीय आवश्यकताओ के आधार पर अन्य कार्यो को भी सम्मिलित किया जा सकता है, परन्तु उस दशा में नये कार्यो को राज्य रोजगार गारन्टी परिषद द्वारा संरचित कर भारत सरकार को सूचित किया जायेगा, जिसे केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित किया जायेगा।
क्रियान्वयन:
कुल चयनित कार्यो की लागत के आधार पर कम से कम 50 प्रतिशत कार्य ग्राम पंचायत द्वारा क्रियान्वित किये जायेगे।
यदि कोई क्रियान्वयन एजेंसी 15 दिवस में कार्य शुरू करने और रोजगार उपलब्ध कराने में असमर्थ होती है तो कार्यक्रम अधिकारी को यह अधिकार होगा कि वह क्षेत्र पंचायत के लिए निर्मित वार्षिक प्लान में चयनित एजेंसी के पैनल में से किसी अन्य एजेंसी को दायित्व सौंप सकता है।
यदि ग्राम पंचायत द्वारा 15 दिवस में कार्य संपादन नही किया जाता तो कार्यक्रम अधिकारी का यह दायित्व होगा कि वह आवेदको को किसी अन्य क्रियान्वयन एजेंसी के अधीनस्थ कार्य उपलब्ध कराये।
जिला कार्यकम समन्वयक द्वारा क्रियान्वयन एजें सियों पर प्रभावी नियंत्रण योजना के सफल क्रियान्वयन हेतु जिला कार्यक्रम समन्वयक पूर्ण रूप से उत्तरदायी है। जिले के अन्तर्गत कार्यरत राज्य सरकार के समस्त अधिकारी जिला पंचायत एवं अन्य स्थानीय संस्थाओ के समस्त अधिकारी, जिला कार्यक्रम समन्वयक के प्रति जिम्मेदार होगें।
जिला स्तर पर कार्यरत समस्त क्रियान्वयन एजेंसी जिला कार्यक्रम समन्वयक के पर्यवेक्षण में ही योजनाओं का क्रियान्वयन करेंगी।
जिला कार्यक्रम समन्वयक किसी भी क्रियान्वयन एजेंसी के कार्य आरंभ करने में असफल होने पर क्रियान्वयन एजेंसी को बदलकर अन्य एजेंसी का निर्धारण कर सकेगा।
योजना के सफल क्रियान्वयन हेतु जिला कार्यक्रम समन्वयक द्वारा जारी निर्देशो के पालन में यदि किसी अधिकारी द्वारा लापरवाही बरती जाती है अथवा आदेशो का पालन नही किया जाता है तो उसे कर्तव्यो के प्रति लापरवाही माना जायेगा।
ठेकेदारी प्रथा/मशीनों पर प्रतिबन्ध योजना के क्रियान्वयन में ठेकेदारी प्रथा प्रतिबन्धित रहेगी। संरचना की सुरक्षा एवं गुणवत्ता के निर्धारित मापदण्डो को सुनिश्चित करते हुये मानव श्रम को विस्थापित करने वाली मशीनो ;स्ंइवनत क्पेचसंबपदह डंबीपदमद्ध का प्रयोग सम्भव जहाँ तक व्यावहारिक हो ;।े ​िंत ें चतंबजपबंइसमद्ध प्रतिबन्ध रहेगा।


कार्यस्थल पर देय सुविधाये एवं क्षतिपूर्ति:
कार्यस्थल पर प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा ;थ्पतेज ंपक इवगद्ध, पेयजय, छाँव हेतु शेड, क्रैच (जब 6 वर्ष से कम आयु के 5 से अधिक शिशु कार्य स्थल पर हो) अनिवार्य रूप से कार्यदायी संस्था द्वारा उपलब्ध कराया जायेगा। 6 वर्ष से कम आयु के 5 से अधिक शिशुओं के कार्यस्थल पर होने की दशा में एक व्यक्ति (महिला को प्राथमिकता) को उन शिशुओं की देखभाल के लिए नियोजित किया जायेगा, जिसके लिए उचित वित्तीय प्राविधाना कार्य की लागत में किया जायेगा।
योजनान्तर्गत कार्यरत व्यक्ति की मृत्यु होने पर अथवा कार्य करते समय दुर्घटना से स्थायी अपंगता होने की स्थिति में उसे क्रियान्वयन एजेंसी द्वारा राशि अधिकतम रू0 25000/ तक हर्जाना के रूप में स्वीकृत किया जायेगा तथा राशि स्थिति के अनुसार वैद्य उत्तराधिकारी को अथवा अपंग व्यक्ति को दी जायेगी।
योजनान्तर्गत कार्यरत व्यक्ति को चोट लगने अथवा कार्य करते समय दुर्घटना से अस्थायी अपंगता की स्थिति में क्रियान्वयन एजेंसी द्वारा नि:शुल्क आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जायेगी।
मजदूरी का भुगतान:
योजनान्तर्गत कार्य करने वाले प्रत्येक श्रमिक को राज्य सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी का भुगतान किया जायेगा। न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948 के अन्तर्गत अधिसूचित दर पर मजदूरी का निर्धारण किया जायेगा।
महिला एवं पुरूषो में मजदूरी भुगतान में कोई भेदभाव नही किया जायेगा।
मजदूरी का भुगतान बैंक/पोस्ट आफिस के माध्यम से किया जायेगा।
मजदूरी भुगतान के समय भुगतान का अंकन जॉब कार्ड में किया जायेगा।
बेरोजगारी भत्ता:
यदि योजनान्तर्गत आवेदन करने वाले श्रमिक को उसके आवेदन के 15 दिनों के अन्दर अथवा उसके द्वारा आवेदित तिथि से (जो भी पहले हो) को रोजगार उपलब्ध नही कराये जा सके, तो आवेदक बेरोजगारी भत्ता प्राप्त करने का हकदार होगा। बेरोजगारी भत्ते के रूप में भुगतान योग्य कुल राशि का योग वित्तीय वर्ष में किसी परिवार को न्यूनतम मजदूरी दर पर प्रदान की गई मजदूरी की कुल राशि एवं बेरोजगारी भत्ता के रूप में प्रदान की गई कुल राशि का योग 100 दिवस की न्यूनतम मजदूरी के योग से ज्यादा नही होगा।
बेरोजगारी भत्ते की राशि वित्तीय वर्ष में प्रथम 30 दिवस हेतु न्यूनतम मजदूरी दर के एक चौथाई होगी तथा शेष अवधि के लिए न्यूनतम मजदूरी दर से आधी होगी।
प्रत्येक वर्ष लेबर बजट तथा वार्षिक प्लान तैयार करते समय इस बिन्दु को अवश्य ध्यान में रखा जायेगा कि कार्य योजना में पर्याप्त परियोजनायें सम्मिलित हो तथा संसाधनो की व्यवस्था भी पर्याप्त हो, जिससे इच्छुक श्रमिको को रोजगार उपलब्ध कराने में कोई बाधा उत्पन्न न हो। बेरोजगारी भत्ता भुगतान की स्थिति में विकास खण्ड स्तर पर कार्यक्रम अधिकारी एवं जिला स्तर पर जिला कार्यक्रम समन्वयक/मुख्य विकास अधिकारी उत्तरदायी होगें।
जिला कार्यक्रम समन्वयक यह सुनिश्चित करेंगे कि किसी भी व्यक्ति को शिक्षित बेरोजगारी भत्ता अथवा रोजगार गारन्टी योजना दोनो का लाभ प्राप्त न हो। इस हेतु जिला कार्यक्रम समन्वयक द्वारा जिला सेवायोजन अधिकारी से समन्वय स्थापित कर उपरोक्त व्यवस्था सुनिश्चित की जायेगी।

जिला ग्राम्य विकास अभिकरण,मुजफ्फरनगर के माध्यम से संचालित विभिन्न विकास योजनाओं का संक्षिप्त विवरण।

स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्वरोजगार योजना (एस0जी0एस0वाई0)

इस योजनान्तर्गत गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले (बी0पी0एल0) ग्रामीण परिवारों करे समूहगत/व्यक्तिगत स्वरोजगारी के रूप में बैको से ऋण दिलाकर उनकी इच्छा अनुसार परिसम्पत्ति क्रय कराकर विकास खण्ड के माध्यम से लाभान्वित कराया जाता है। 10 से 20 बी0पी0एल0ग्रामीण परिवारों का सम्बन्धित ग्राम विकास अधिकारी द्वारा समूह गठित किया जाता है। समूह प्रतिमाह अपनी बैठक करता है एवं बैठक मं ही अपने नियमों एवं बचत की जाने वाली धनराशि का निर्धारण सर्वसम्मति से करता है। बचत धनराशि को समूह सदस्यों को उनकी छोटीछोटी आवश्यकताओं को पूर्ण करने हेतु उधार स्वरूप दिया जाता है जिसे ब्याज सहित किस्तों में वसूल करते है। समूह का बैक में बचत खाता खुलवाया जाता है जिसका संचालन समूह अध्यक्ष/सचिव व कोषाध्यक्ष द्वारा किया जाता है। समूह गठन के 6 माह बाद 3 सदस्यीय समिति द्वारा समूह का मूल्यांकन निधारित बिन्दुआें पर किया जाता है। समूह द्वारा न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक प्राप्त करने पर समूह को प्रथम ग्रेड उत्तीर्ण मान लिया जाता है। तत्पश्चात समूह की बचत धनराशि के समतुल्य अथवा न्यूनतम 5000/रूपये अथवा बचत के समतुल्यं अधिकतम 10000/रूपये रिवाल्विंग फण्ड के रूप में सम्बन्धित खण्ड विकास अधिकारी द्वारा समूह के खाते में हस्तान्तरित कर दिये जाते है। समूह की बचत तथा रिवाल्विंग फण्ड की धनराशि के एक गुणा से चार गुणा तक बैंक समूह की सी0सी0एल0स्वीकृत करता है। समूह अपनी बचत तथा सीसीएल के रूप मंें स्वीकृत धनराशि में से आवश्यकतानुसार धनराशि आहरित कर अपने सदस्यों को ऋण के रूप में देता हैं तथा ब्याज सहित किस्तों में सदस्यों से वसूल करता है। बैंक द्वारा सी0सी0एल0 के स्वीकृत करने के 6 माह बाद समूह का पुन: निर्धारित बिन्दुओं पर 4 सदस्यीय समिति द्वारा मूल्यांकन किया जाता है। द्वितीय ग्रेड उत्तीर्ण माना जाता है। तत्पश्चात सम्बन्धित ग्राम विकास अधिकारी द्वारा समूह द्वारा प्रस्तावित परियोजना के लिए समूह का ऋण आवेदन पत्र भरकर खण्ड विकास अधिकारी के माध्यम से सम्बन्धित बैंक को भेजा जाता है। समूह को 10000/प्रति सदस्य अधिकतम 1.25 लाख रूपये अथवा बैंक द्वारा स्वीकृत धनराशि का 50 प्रतिशत जो भी कम हो अनुदान धनराशि स्वीकृत ऋण के विपरीत दी जाती है। समूह सदस्य बैंक द्वारा दी गयी ऋण धनराशि के विपरीत अपनी परिसम्पत्ति क्रय करते है तथा बैंक द्वारा निर्धारित किस्त की धनराशि प्रतिमाह बैंक में जमा करते हुए ऋण की अदायगी करते है। सामान्यत: ऋण की वसूली बैक द्वारा 3

से 5 वर्ष के मध्य की जाती है। अनुदान की धनराशि के विपरीत बैंक द्वारा समूह से ब्याज नही लिया जाता है। योजनान्तर्गत 50 प्रतिशत अनु0जाति, 40 प्रतिशत महिलाओं, 3 प्रतिशत विकलांगों तथा 15 प्रतिशत अल्पसंख्यको को लाभान्वित कराने का प्राविधान है। शासन की प्राथमिकता को दृष्टिगत रखते हुए अधिकतम 25 प्रतिशत स्वरोजगारियों को व्यक्तिगत स्वरोजगारी के रूप में लाभान्वित कराया जाता है। सामान्य जाति के व्यक्तिगत स्वरोजगारियों को इकाई लागत का 30 प्रतिशत अधिकतम 7500/रूपये तथा अनु0जाति के व्यक्तिगत स्वरोजगारी को इकाई लागत का 50 प्रतिशत 10000/अनुदान धनराशि दी जाती है।
इन्दिरा आवास योजना (आई0ए0वाई0)

इस योजनान्तर्गत गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले (बी0पी0एल0) आवासविहीन/कच्चे आवास वाले ग्रामीण परिवारों को नव आवास बनाने हेतु अंकन 35000/रूपये अनुदान धनराशि दो किस्तों मेंं दी जाती है। बी0पी0एल0परिवारों में से आवासविहीन एवं कच्चे आवास वाले परिवारों को स्थाई प्रतीक्षा सूची बी0पी0एल0सर्वे 2002 के आधार पर तैयार की गयी है। इस सूची में से पात्र परिवारों का चयन शासन द्वारा निर्धारित प्राथमिकता के आधार पर गांव सभा द्वारा किया जाता है। तत्पश्चात सम्बन्धित ग्राम विकास अधिकारी द्वारा चयनित परिवारों का बैंक में बचत खाता खुलवाकर उनका आवेदन पत्र समस्त औपचारिकताएं पूर्ण करते हुए भरकर खण्ड विकास अधिकारी के माध्यम से जिला ग्राम्य विकास अभिकरण को भेजा जाता है। जिला ग्राम्य विकास अभिकरण द्वारा प्रथम किस्त के रूप में 26250/रूपये लाभार्थी के बचत खाते में सीधे भेज दी जाती है। इस धनराशि से लाभार्थी ग्राम विकास अधिकारी के मार्ग दर्शन में शासन द्वारा स्वीकृत डिजाइन के अनुसार स्वयं आवास का निर्माण कराता है। प्रथम किस्त की धनराशि से लाभार्थी को शौचालय एवं आवास का निर्माण कराना होता है। प्रथम किस्त की धनराशि का उपभोग कर लेने के उपरान्त सम्बन्धित ग्राम विकास अधिकारी द्वारा द्वितीय किस्त की अवमुक्ति की संस्तुति करते हुए मांग पत्र खण्ड विकास अधिकारी के माध्यम से जिला ग्राम्य विकास अभिकरण को भिजवाया जाता है। तत्पश्चात अभिकरण कार्यालय से द्वितीय किस्त के रूप में अवशेष धनराशि लाभार्थी के बैक खाते में हस्तान्तरित कर दी जाती है। शासन से प्राप्त मार्ग निर्देशों के अनुसार 75 प्रतिशत लक्ष्यों का निर्धारण आवास विहीन परिवारों की संख्या एवं शेष 25 प्रतिशत लक्ष्यों का निर्धारण अनु0जाति की जनसंख्या के आधार पर किया जाता है। योजनान्तर्गत 60 प्रतिशत अनु0जाति, 3 प्रतिशत विकलांग एवं 15 प्रतिशत अल्पसंख्यकों को लाभान्वित कराने का प्राविधान है। आवास विहीन परिवारों की स्थाई प्रतीक्षा सूची में से प्राथमिकता क्रम के अनुसार लाभार्थियों को लाभान्वित कराने का प्राविधान है।