सरकारी विभाग

  • जिला ग्राम्य विकास अभिकरण,मुजफरनगर

    जिला ग्राम्य विकास अभिकरण,मुजफरनगर के माध्यम से संचालित विभिन्न विकास योजनाओं का संक्षिप्त विवरण

       

    1–स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्वरोजगार योजना (एस0जी0एस0वाई0)

     

      इस योजनान्तर्गत गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले (बी0पी0एल0) ग्रामीण परिवारों को समूहगत /व्यक्तिगत स्वरोजगारी के रूप में बैंको से ऋण दिलाकर उनकी इच्छा अनुसार परिसम्पत्ति क्रय कराकर विकास खण्ड के माध्यम से लाभान्वित कराया जाता है। 10 से 20 बी0पी0एल0 ग्रामीण परिवारों का सम्बन्धित ग्राम विकास अधिकारी द्वारा समूह गठित किया जाता है। समूह प्रतिमाह अपनी बैठक करता है एवं बैठक में ही अपने नियमों एवं बचत की जाने वाली धनराशि का निर्धारण सर्वसम्मति से करता है। बचत धनराशि को समूह सदस्यों को उनकी छोटी–छोटी आवश्यताओं को पूर्ण करने हेतु उधार स्वरूप दिया जाता है जिसे समूह ब्याज सहित किस्तों में वसूल करते है। समूह का बैंक में बचत खाता खुलवाया जाता है जिसका संचालन समूह अध्यक्ष/सचिव व कोषाध्यक्ष द्वारा किया जाता है। समूह गठन के 6माह बाद 3 सदस्यीय समिति द्वारा समूह का मूल्यांकन निर्धारित बिन्दुओं पर किया जाता है। समूह द्वारा न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक प्राप्त करने पर समूह को प्रथम ग्रेड उत्तीर्ण मान लिया जाता है तत्पश्चात समूह की बचत धनराशि के समतूल्य अथवा न्यूनतम 5000/–रूपये एवं अधिकतम 10000/–रूपये रिवाल्विंग फण्ड के रूप में सम्बन्धित खण्ड विकास अधिकारी द्वारा समूह के खाते में हस्तान्तरित कर दिये जाते है। समूह की बचत तथा रिवाल्विंग फण्ड की धनराशि के एक गुणा से चार गुणा तक बैैक समूह की सी0सी0एल0 स्वीकृत करता है। समूह अपनी बचत तथा सी0सी0एल0 के रूप में स्वीकृत धनराशि में से धनराशि आहरित कर अपने सदस्यों को ऋण के रूप में देता है तथा ब्याज सहित किस्तों में सदस्यों से वसूल करता है। बैंक द्वारा सी0सी0एल0 स्वीकृत करने के 6 माह बाद समूह का पुन: निर्धारित बिन्दुओं पर 4 सदस्यीय समिति द्वारा मूल्यांकन किया जाता है। समूह द्वारा न्यूनतम 75 प्रतिशत अंक प्राप्त करने पर समूह को द्वितीय ग्रेड उत्तीर्ण माना जाता है। तत्पश्चात सम्बन्धित ग्राम विकास अधिकारी द्वारा समूह द्वारा प्रस्तावित परियोजना के लिए समूह का ऋण आवेदन पत्र भरकर खण्ड विकास अधिकारी के माध्यम से सम्बन्धित बैंक को भेजा जाता है। समूह को 10000/–प्रति सदस्य अधिकतम 1,25 लाख रूपये अथवा बैंक द्वारा स्वीकृत धनराशि का 50 प्रतिशत जो भी कम हो अनुदान धनराशि स्वीकृत ऋण के विपरीत दी जाती है। समूह सदस्य बैंक द्वारा दी गयी ऋण धनराशि के विपरीत अपनी परिसम्पत्ति क्रय करते है तथा बैंक द्वारा निर्धारित किस्त की धनराशि प्रतिमाह बैंक में जमा करते हुए ऋण की अदायगी करते है। सामान्यत: ऋण की वसूली बैंक द्वारा 3 से 5 वर्ष के मध्य की जाती है। अनुदान की धनराशि के विपरीत बैंक द्वारा समूह से ब्याज नही लिया जाता है तथा इसका समायोजन ऋण की अन्तिम किस्तों के विपरीत किया जाता है। योजनान्तर्गत 50 प्रतिशत अनु0जाति, 40 प्रतिशत महिलाओं, 3 प्रतिशत विकलांगों तथा 15 प्रतिशत अल्पसंख्यको को लाभान्वित कराने का प्राविधान है। शासन की प्राथमिकता को दृष्टिगत रखते हुए अधिकतम 25 प्रतिशत स्वरोजगारियों को व्यक्तिगत स्वरोजगारी के रूप मेेें लाभान्वित कराया जाता है। सामान्य जाति के व्यक्तिगत स्वरोजगारियों को इकाई लागत का 30 प्रतिशत अधिकतम 7500/–रूपये तथा अनु0जाति के व्यक्तिगत स्वरोजगारियो को इकाई लागत का 50 प्रतिशत अधिकतम 10000/–अनुदान धनराशि दी जाती है।

    2–इन्दिरा आवास योजना (आई0ए0वाई0)

    इस योजनान्तर्गत गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले (बी0पी0एल0) ग्रामीण परिवारों को नव आवास बनाने हेतु अंकन 35000/–रूपये अनुदान धनराशि दो किस्तो में दी जाती है। बी0पी0एल0 परिवारो में से आवासविहीन परिवारों की स्थाई प्रतीक्षा सूची बी0पी0एल0 सर्वे के आधार पर तैयार की गयी है। इसी सूची में से पात्र परिवारों का चयन शासन द्वारा निर्धारित प्राथमिकता के आधार पर गांव सभा द्वारा किया जाता है। तत्पश्चात सम्बन्धित ग्राम विकास अधिकारी द्वारा चयनित परिवारों के बैक में बचत खाते खुलवाकर उनका आवेदन पत्र समस्त औपचारिताएं पूर्ण करते हुए भरकर खण्ड विकास अधिकारी के माध्यम से जिला ग्राम्य विकास अभिकरण को भेजा जाता है। जिला ग्राम्य विकास अभिकरण द्वारा प्रथम किस्त के रूप में 26250/–रूपये लाभार्थी के बचत खाते मेें सीधे भेज दी जाती है। इस धनराशि से लाभार्थी ग्राम विकास अधिकारी के मार्ग दर्शन में शासन द्वारा स्वीकृत डिजाइन के अनुसार स्वयं आवास का निर्माण करता है। प्रथम किस्त की धनराशि से लाभार्थी को शौचालय एवं आवास का निर्माण करना होता है। प्रथम किस्त की धनराशि का उपभोग कर लेने के उपरान्त सम्बन्धित ग्राम विकास अधिकारी द्वारा द्वितीय किस्त की अवमुक्ति की संस्तुति करते हुए मांग पत्र खण्ड विकास अधिकारी के माध्यम से जिला ग्राम्य विकास अभिकरण को भिजवाया जाता है। तत्पश्चात अभिकरण कार्यालय से द्वितीय किस्त के रूप में अवशेष धनराशि लाभार्थी के बैंक खाते में हस्तान्तरित कर दी जाती है। शासन से प्राप्त मार्ग निर्देशों के अनुसार 75 प्रतिशत लक्ष्यों का निर्धारण आवास विहीन परिवारों की संख्या एवं शेष 25 प्रतिशत लक्ष्यों का निर्धारण अनु0जाति की जनसंख्या के आधार पर किया जाता है। योजनान्तर्गत 60 प्रतिशत अनु0जाति ,3 प्रतिशत विकलांग एवं 15 प्रतिशत अल्पसंख्यको को लाभान्वित कराने का प्राविधान है। आवासविहीन परिवारों की स्थाई प्रतीक्षा सूची में से प्राथमिकता क्रम के अनुसार लाभार्थियों को लाभान्वित कराया जाता है।
     

    3– विधान मण्डल क्षेत्र विकास निधि:–

     

    विधायक निधि अन्तर्गत प्रत्येक विधान मण्डल के मा0 सदस्य द्वारा अनुभव की जा रही आवश्यक्ताओं के अनुरूप सम्बन्धित मुख्य विकास अधिकारी को निर्माण कार्यो का विवरण देंगें, जो स्थापित प्रक्रियाओं के अनुसार उन्हें कार्यान्वित करायेंगें। अर्थात मुख्य विकास अधिकारी मार्गदर्शी सिद्वान्तों के अधीन कार्य करते हुए राज्य सरकार की स्थापित प्रक्रियाओं का अनुपालन करेंगें। योजनान्तर्गत वित्तीय वर्ष 2007–2008 से 125.00 लाख रू0 प्रत्येक विधन सभा क्षेत्र एवं विधान परिषद सदस्य हेतु आबंटित किये जाते हैं। योजनान्तर्गत निम्न प्रकार के कार्य कराये जा सकते हैं।
    1– विद्यालयों, छात्रावासों, पुस्तकालयों के लिए भवनों और शिक्षण संस्था के अन्य भवनों का निर्माण जो सरकार अथवा स्थानीय निकायों के अधीन हों।
    2– गॉवों कस्बों अथवा नगरों में लोगों को पेयजल उपलब्ध कराये जाने हेतु नलकूपों और पानी की टंकियों का निर्माण अथवा ऐसे अन्य निर्माण कार्यो का निष्पादन जो इस दृष्टि से सहायक हो।
    3– गॉवों और कस्बों तथा नहरों के किनारे सडकों का निर्माण जिसमें पार्ट सडकें, सम्पर्क मार्ग, लिंक सडकें आदि सम्मिलित हों।
    4– सार्वजनिक प्रस्तकालय एवं वाचनालय
    5– शवदाह/शमशान भूमि व शवदागृहों और ढांचों, कब्रिस्तान, ग्रेवयार्ड सैमेंट्री का निर्माण।
    6– सार्वजनिक शौचालय और स्नानगृहों का निर्माण
    7– नाले और गटर

    विधायक निधि के अन्तर्गत न कराये जा सकने वाले कार्यो की सूची

    1– केन्द्रीय अथवा राज्य सरकारों के विभागों, अभिकरणों या संगठनों से सम्बन्धित कार्यालय भवन, आवासीय गृहों अथवा अन्य भवनों का निर्माण
    2– वाणिज्यिक संगठनों, निजी संस्थाओं, अथवा सहकारी संगठनों से सम्बन्धित कार्य
    3– किसी भी टिकाऊ परिसम्पत्ति के संरक्षण/उन्नयन के लिए विशेष मरम्मत कार्य को छोडकर किसी भी प्रकार की मरम्मत एवं अनुरक्षण सम्बन्धी कार्य
    4– अनुदान और ऋण
    5– स्मारक या स्मारक भवन
    6– किसी भी प्रकार की वस्तु, सामान की खरीद अथवा भण्डार
    7– भूमि के अधिग्रहण अथवा अधिग्रहीत भूमि के लिए कोई भी मुवावजा राशि
    8– व्यक्तिगत लाभ के लिए परिसम्पत्ति उन परिसम्पत्तियों को छोडकर जो अनुमोदित
    योजनाओं के भाग हैं।
    9– धार्मिक पूजा के लिए स्थान
    10– पूर्णत: कच्चे मार्ग का निर्माण

    डाउनलोड करें

    इंदिरा आवास  योजना , जनपद -मुज़फ्फरनगर नव आवास/स्तरोन्नयन  हेतु आवेदन पत्र